आज के वचन पर आत्मचिंतन...

जातीय एवं सांस्कृतिक बाधाओं के माध्यम से तोड़ना कभी आसान नहीं होता है। शुक्र है कि परमेश्वर की आत्मा हमें अपने हमारे पूर्वधारणा में आराम से बसने नहीं देता। इसके बदले, हमें जातीय घृणा और सांस्कृतिक अज्ञानता के माध्यम से चुनौती देने, नेतृत्व करने और तोड़ने के लिए प्रेरित किये जाते है। आइए हम ऐसे बनें जो आनन्दित हों और परमेश्वर की स्तुति करें क्योंकि लोगों को विभाजित करने वाला हर अवरोध गिरता है। आइए तब तक बने रहें जब तक कि सुसमाचार की सिद्ध वायदा पूरा नहीं हो जाता | "अब कोई यहूदी या अन्यजाति, दास या स्वतंत्र, पुरुष या स्त्री नहीं है। क्योंकि अब आप सभी मसीही हैं - आप मसीह यीशु में एक हैं" (गलातियों 3:28)। ऐसा करने के द्वारा, हम स्वर्ग के उस अविश्वसनीय गान का अनुमान लगाते हैं जो हर भाषा, जाति, लोगों और राष्ट्र के लोगों के साथ परमेश्वर की प्रशंसा करती है (प्रकाशितवाक्य 7: 9-11)।

मेरी प्रार्थना...

पवित्र परमेश्वर, मैं यह प्रार्थना करता हुँ कि आप उन सभी लोगों को आशीष दे, जो सांस्कृतिक, बहु - भाषा और राष्ट्रवादी बाधाओं को पार करके, यीशु के अनुग्रह को उन लोगों के साथ साझा करते हैं जो आपको नहीं जानते हैं। उन्हें यह जानने में सहायता करें कि वे आपको आनंदित कर रहे हैं और उस महिमा की आशा कर रहे हैं जो आपके चरों ओर घिरा हुआ है| यीशु के नाम से मैं प्रार्थना करता हुँ । आमीन !

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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