आज के वचन पर आत्मचिंतन...

शब्द सामर्थी है। संवाद करने वाले इसे जानते हैं। मध्यस्थी इसे जानते हैं। दिल में कहीं तुम भी इसे जानते हो। शब्दों ने तुम्हे आशीषित किया हैं और शब्दों ने तुम्हे तबाह भी किया हैं। दयालु और स्नेह भरे शब्दों से जो चंगाई मिलती है वह मूल्यवान हैं। क्रूर ताने से होने वाले तभाही से और बढ़िया से बताया हुआ धोका तीव्र चोटिल होता हैं। इस तरह की शक्ति होना यह अध्भुत हैं। इस अध्भुत शक्ति को उपयोग करना जो हमारी बातों में पायी जाती हैं यह अध्भुत जिम्मेदारी हैं। शब्दों में जीवन देने की, आशा देने की और शांति देने की शक्ति हैं जब प्रेम से येशु को आदर देने के लिए इस्तेमाल किया जाए। वह शब्द को आज बोलते हैं !

Thoughts on Today's Verse...

Words are powerful. Communicators know this. Negotiators know this. Deep down, you know this. Words have blessed you and words have devastated you. The healing that comes from a kind and tender word is precious. The destruction of a cruel taunt or a well-told deception is crushing. To have such power is amazing. To use this awesome power found in our speech is an awesome responsibility. Words do have the power to give life, hope, and peace when offered in love to honor Jesus. Let's speak that word today!

मेरी प्रार्थना...

हे पिता, मैं चाहता हूं की आज मेरे शब्द आशिष के हो। मैं चाहता हूं की वे आपके अनुग्रह का प्रतिबिम्भ हो। मैं चाहता हूं की जो चोटिल हैं वे उनके लिए चंगाई और जो दुखी हैं उनके लिए समाधान के हो। मैं चाहता हूं, जो टूटे हुए हैं उनके लिए कोमलता के हो। मैं चाहता हूं की कठिन परिस्तिथियों में वे आदरणीय और सत्य के हो। मैं चाहता हूं की वे न्यायी हो जब मेरे आसपास की भाषा अश्लील हो। अपनी आत्मा के द्वारा मेरी बातों को इस्तेमाल करें की वे दूसरों के लिए आशीष और आपके प्रति स्तुति की हो, येशु के नाम से जो सर्वश्रेष्ठ नाम हैं, प्रार्थना करता हूं। अमिन।

My Prayer...

O Father, I want my words to be a blessing today. I want them to reflect your grace. I want them to bring healing to the hurting and comfort to the grieving. I want them to be tender with the broken. I want them to be honorable and truthful in difficult circumstances. I want them to be upright when the language around me is crude. Through your Spirit, use my speech to bless others and bring you praise. In the name of Jesus, your ultimate Word, I pray. Amen.

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। phil@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

Today's Verse Illustrated


Inspirational illustration of नितिवचन १५:४

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