आज के वचन पर आत्मचिंतन...

मसीही होने के नाते, हम क्षमा और अनुग्रह के वातावरण में रहते हैं । जबकि हम हम दूसरों को क्षमा करते हैं, उस क्षमा का बुनियाद यह अध्भुत कर्ज हैं जो की परमेश्वर ने पहले ही क्षमा कर दिया हैं( मत्ती १८)। पर उसी समय, जब परमेश्वर देखता हैं की यह क्षमा हम से दूसरों की ओर बढ़ाई जारी हैं और दी जारी हैं, वह और अधिक क्षमा हम पर आनंद से उंडेलता हैं। कितना कठिन होता हैं किसीको क्षमा करना जब हमे सचमे चोट पहोचती हैं, येशु चाहते हैं की हम यह जाने की ऐसा करने की आशीष कई गुना बड़ी हैं उसकी कीमत से!

मेरी प्रार्थना...

प्रेमी और न्यायी परमेश्वर, धन्यवाद की अपने मुझे शुद्ध और क्षमा किया अपने पुत्र येशु के संतुष्ट बलिदान द्वारा। मुझे औरों को क्षमा करने के लिए चुनौती देने के लिए धन्यवाद जैसे की आप ने मुझे क्षमा किया हैं। धन्यवाद की अपने अपने लोगों से मांग राखी की वे क्षमा करेने वाला समाज बने। हमें क्षमा करें विषेशकर मुझे क्षमा करे, जब हम क्षमा करने के खिलाफ हो, धीरे हो या शंकित हो । विशेषकर मैं मांगता हूँ की आप—————— को ——————— करने के लिए क्षमा करे, और यह भी की आप उस व्यक्ति को आशीषित करे अपने प्रेम और अनुग्रह से। येशु के नाम से मांगता हूँ। आमीन ।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। phil@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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