आज के वचन पर आत्मचिंतन...

जब कोई भी वस्तु हमें उस प्रेम से अलग नहीं कर सकती जो परमेश्वर का हमारे लिए मसीह यीशु में है, तो फिर डरने की क्या बात है? (रोमियों 8:38-39) ​जब परमेश्वर ने हमें बदलने, सामर्थ्य देने और पवित्र करने के लिए अपनी आत्मा हमारे मनों में उंडेल दी है, तो फिर डरने की क्या बात है? (2 कुरिन्थियों 3:18; गलातियों 5:22-23; 1 कुरिन्थियों 6:11) ​जब परमेश्वर ने अपना पुत्र भेजा कि हमें मोल ले और "अपनी दृष्टि में पवित्र और निष्कलंक और निर्दोष बनाकर उसके साम्हने उपस्थित करे", तो फिर डरने की क्या बात है? (कुलुस्सियों 1:21-22) ​जैसा कि प्रेरित पौलुस ने घोषणा की है: ​"अतः हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? जिस ने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया, वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्यों न उदारतापूर्वक देगा?" (रोमियों 8:31-32) ​हम परमेश्वर की सन्तान हैं। वह हमसे प्रेम करता है। उसका हमारे लिए प्रेम दूसरों के प्रति हमारे अल्प प्रेम की तुलना में कहीं अधिक उत्तम, समृद्ध और गहरा है। हम डर के कारण परमेश्वर से दूर भागने के बजाय, धन्यवाद के साथ उसके सामने आनंदपूर्वक झुकते हैं, यह जानते हुए कि हमारा पिता जो हमारी प्रार्थना सुनता है, वही हमसे प्रेम करता है और हमारे डर को शांत करने की अभिलाषा रखता है। और उसके कारण, उसके प्रेम में हमें कोई डर नहीं।

मेरी प्रार्थना...

हे प्रेममय पिता, मैं आपको धन्यवाद देता हूँ कि मैं बिना किसी भय के आपकी प्रिय सन्तान के रूप में आपके पास आ सकता हूँ। मैं कोमलता और श्रद्धा के साथ, अपनी आवश्यकता और भरोसे के साथ, अपने टूटे हुए मन और विस्मय के साथ आपके सम्मुख आ सकता हूँ। आप पवित्र, प्रतापी और विस्मयकारी हैं, फिर भी मुझे अपनी कमियों के साथ आपके पास आने में भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है। मुझ पर आपके प्रेम के कारण मेरे भीतर आपकी पवित्रता, धार्मिकता, न्याय और दया के प्रति वैसी समानता उत्पन्न हो, जैसी कोई भी डर कभी उत्पन्न नहीं कर सकता। मैं यीशु के सामर्थी नाम में प्रार्थना करता हूँ, जिसने मुझे पाप से छुड़ाया और मुझ पर अपना प्रेम उंडेल दिया। आमीन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। phil@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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