आज के वचन पर आत्मचिंतन...

जैसा ही सुलैमान ने मंदिर को समर्पित किया है , उन्होंने महसूस किया है कि महान सुंदरता की यह जबरदस्त उपलब्धि ब्रह्मांड के निर्मान कर्त को घर देने के लिए बहुत महत्वहीन और छोटी है । लेकिन, परमेश्वर ने नश्वर के साथ रहने का विकल्प चुना। यही है यीशु का जीवन (यूहन्ना १: ११-१ पड़े )। परमेश्वर भययोग्य है और वर्णन से परे है, और आपवित्र मनुष्यों के साथ संबद्ध में रहने के लिए बहुत पवित्र है। लेकिन परमेश्वर हमें प्यार किया है और हमारे साथ रहने के लिए चुना है ताकि हम उसके पास लौट सकें और उसकी महिमा में साझा कर सकें।

Thoughts on Today's Verse...

As Solomon dedicated the Temple, he realized that this tremendous accomplishment of great beauty was far too insignificant and small to house the Creator of the Universe. But, God did choose to dwell with mortals. That is what the life of Jesus is about (John 1:11-18). God is awesome and beyond description, far too holy to be expected to associate with flawed human beings. As God, however, he has chosen to love us and come and live with us so we can return to him and share in his glory.

मेरी प्रार्थना...

सर्वशक्तिमान परमेश्वर और संप्रभु पिता, आप मेरे शब्दों का वर्णन से भी अद्भुत है और मेरे हृदय की तुलना में अधिक अनुग्रह करने वाले हैं। आपकी महिमा के लिए धन्यवाद, जो मानवीय समझ से परे है और आपकी कृपा जो हमारे बीच की दूरी को पाटती है। प्रिय पिता हमारे परमेश्वर बने रहने के लिए धन्यवाद। यीशु के नाम में मैं प्रशंसा करता हूँ। अमिन ।

My Prayer...

Almighty God and Sovereign Father, you are more magnificent than my words can describe and more gracious than my heart can fully grasp. Thank you for your glory that is beyond human comprehension and your grace that bridges the awesome distance between us. Thank you, dear Father, for being God. In Jesus' name I praise. Amen.

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। phil@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

Today's Verse Illustrated


Inspirational illustration of 2 इतिहास 6:18

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