आज के वचन पर आत्मचिंतन...
जब हम पहाड़ों को देखते हैं, तो उनकी तुलना में हम स्वयं को अत्यंत छोटे और तुच्छ अनुभव कर सकते हैं। हम जानते हैं कि वे न केवल हमसे कहीं अधिक विशाल हैं, वरन उनका अस्तित्व भी हमारे अस्तित्व से कहीं अधिक प्राचीन है। परंतु परमेश्वर, किसी भी पर्वत की तुलना में कहीं अधिक पहले से उपस्थित था, और है, और सदैव रहेगा (प्रकाशितवाक्य 1:8; यशायाह 41:4)। जीवन की उथल-पुथल के मध्य में केवल परमेश्वर ही सुरक्षा और स्थिरता की एकमात्र सच्ची चट्टान और हमारा दृढ़ गढ़ है (2 शमूएल 22:2)। हमारे अस्तित्व के समस्त युग केवल सर्वशक्तिमान परमेश्वर में ही पाए जाते हैं! अतः, हम यशायाह के साथ मिलकर सनातन सत्य के इन वचनों से एक दूसरे को प्रोत्साहित करते हैं: सदा सर्वदा परमेश्वर पर भरोसा रखो, क्योंकि प्रभु यहोवा सनातन की चट्टान है।
मेरी प्रार्थना...
सनातन परमेश्वर, आप ही महान 'मैं जो हूँ सो हूँ' हैं, वह जो है, और जो था, और जो सदा सर्वदा रहेगा। हम यह विश्वास रखते हैं कि आप ही हमारे परमेश्वर, हमारे छुड़ाने वाले, हमारे उद्धारकर्ता, हमारे चरवाहे, हमारे दृढ़ गढ़, हमारी सामर्थी चट्टान और हमारे सनातन पिता हैं और सदा बने रहेंगे। हम अपने आने वाले सभी कलों को आपको सौंपते हैं, यह जानते हुए कि आप अपने प्रिय बालकों के प्रति सदैव उपस्थित, विश्वासयोग्य और अनुग्रहकारी रहेंगे। यीशु, जो हमारे उद्धारकर्ता और प्रभु हैं, के नाम में हम प्रार्थना करते हैं। आमीन।


