आज के वचन पर आत्मचिंतन...

क्या ही जबरदस्त विचार है ! परमेश्वर मेरे घर में देखा जा सकता है। विश्व का पिता मेरी कलिस्या रहता है।सर्वशक्तिमान परमेश्वर के प्रेम को अपनी जिंदगी में पहचानने योग्य है। ऐसा कैसे? जब मैं मेरे आस-पास के लोगो से प्यार करता हूँ, जब वे लोग वापस मुझे प्यार करते है, जब हम प्रेम का चुनाव करते है इसके बजाये की तुच्छ, क्षमाहीन, आलोचक, कठोर हो, तब परमेश्वर की उपस्तिथि, सामर्थ, और सिद्धता हम में प्रकट होती है।

Thoughts on Today's Verse...

What an incredible thought! God can be seen in my home. The Father of the universe lives in my church. The Almighty God's love is recognizable in my life. How so? When I love those around me, when they love me back, when we choose to be loving instead of petty, unforgiving, critical, and harsh, God's presence, power, and perfection are revealed in us!

मेरी प्रार्थना...

हे पिता, कृपया आपके बच्चो के प्रति मेरे प्यार और उनका एक दुसरो के प्रति प्यार के द्वारा अपनी उपस्तिथि, समर्थ, और सिद्धता को ज्ञात कराये। यीशु के नामसे ये मांगता हूँ। अमिन।

My Prayer...

O Father, please make your presence, power, and perfection known through my love for your children and their love for each other. In Jesus' name I ask this. Amen.

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

Today's Verse Illustrated


Inspirational illustration of १ यूहन्ना ४:१२

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