आज के वचन पर आत्मचिंतन...

परमेश्वर के वचनों के भंडार के रूप में बाइबल का होना एक अत्यंत सामर्थ्यपूर्ण बात है। इसकी प्राचीनता और विभिन्न देशों व संस्कृतियों पर इसका प्रभाव हमें यह स्मरण कराता है कि परमेश्वर का सत्य कितना स्थाई और अटूट है। फिर भी, हम याद रखते हैं कि हमारा भरोसा किसी पुस्तक पर नहीं, बल्कि स्वयं परमेश्वर पर है! विभिन्न संस्कृतियों, सदियों और देशों में उसकी निरंतर उपस्थिति हमें याद दिलाती है कि अनंत काल हमारी समझ से परे है। इसके बावजूद, वह अनंत परमेश्वर हमें अपने हाथों में थामे रखता है, जबकि हम उस मंजिल की ओर यात्रा कर रहे हैं जो उसने हमारे लिए निर्धारित की है। हमारा जीवन, जिसका भविष्य पूरी तरह सुरक्षित है, परमेश्वर में मसीह के साथ छिपा हुआ है और उसकी महिमा के लिए ठहराया गया है (कुलुस्सियों 3:1-4)। हमारे सबसे बुरे दिन, महीने और दुखों, कठिनाइयों, मंदी व चुनौतियों के वर्ष, उस महिमा से कभी तुलना नहीं किए जा सकते जो हम में प्रगट होने वाली है (रोमियों 8:18-21)। हमारा भरोसा हमारे अनंत उद्धारकर्ता पर है, इसलिए आइए हम अपनी आँखें उसी पर टिकाए रखें और अपनी आशाओं को उसी पर और उस महिमा पर केंद्रित रखें जो हमारा इंतजार कर रही है (कुलुस्सियों 3:2; इब्रानियों 12:1-2; 1 पतरस 1:13)। परमेश्वर पर मेरा भरोसा है, और मैं नहीं डरूँगा। यदि परमेश्वर मेरा परमेश्वर है, तो नश्वर मनुष्य मेरा क्या कर सकता है!

मेरी प्रार्थना...

हे महान और अनंत परमेश्वर, आपका धन्यवाद कि आप उस भूमि से भी अधिक स्थिर हैं जिस पर मैं खड़ा हूँ, उन पर्वत चोटियों से भी अधिक स्थायी हैं जिनकी मैं प्रशंसा करता हूँ, और उन महासागरों की लहरों से भी अधिक निरंतर (अपरिवर्तनीय) हैं जिन्हें मैं प्रेम करता हूँ। मैं अपना जीवन, अपना भविष्य और अपने प्राण आपके हाथों में सौंपता हूँ। मैं अपने जीने के तरीके से आपको प्रसन्न करना चाहता हूँ। मैं चाहता हूँ कि मेरा जीवन आपके प्रति निरंतर विश्वासयोग्यता से चिह्नित हो, क्योंकि मेरा भरोसा आप पर है। यीशु के नाम में, मैं अपने ध्यान को आप पर केंद्रित रखने के लिए पवित्र आत्मा की सहायता मांगता हूँ। आमीन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। help@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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