आज के वचन पर आत्मचिंतन...

यीशु ने हमें सिखाया: "इसलिये तुम इस रीति से प्रार्थना किया करो: ‘हे हमारे स्वर्ग के पिता, तेरा नाम पवित्र माना जाए। तेरा राज्य आए। तेरी इच्छा स्वर्ग में जैसी पूरी होती है, वैसे पृथ्वी पर भी हो’" (मत्ती 6:9-10)। जब हम प्रार्थना करते हैं, तो हमारे हृदयों को उस दिन के लिए लालायित रहना चाहिए जब परमेश्वर सारी पृथ्वी पर सार्वभौमिक रूप से मान्यता प्राप्त राजा होगा (फिलिप्पियों 2:10-11)। जब हम यीशु की आदर्श प्रार्थना के आरंभिक शब्दों का उपयोग करते हैं, तो हम परमेश्वर से यह भी माँग रहे हैं कि वह हमारे हृदयों का राजा बने जैसे हम स्वयं को केवल उसे समर्पित करते हैं। हमारे लिए, वह "एकमात्र परमेश्वर है, और उसका नाम ही वह एकमात्र नाम है" जो हमारे हृदयों में राज्य करता है। ये केवल शब्द नहीं हैं। जैसे हम इन्हें कहते हैं, हम उस दिन की प्रतीक्षा करते हैं जब सारी सृष्टि, देखी और अनदेखी, यीशु को परमेश्वर के रूप में स्वीकार करेगी। अपवित्रता के संसार में, एक ऐसी दुनिया में जहाँ परमेश्वर के नाम की निंदा की जाती है, और एक ऐसी दुनिया में जहाँ परमेश्वर की महानता को अक्सर अनदेखा किया जाता है, हम उस प्रतिज्ञा को थामे रखते हैं कि हर घुटना टिकेगा और हर जीभ स्वीकार करेगी, स्वर्ग में, पृथ्वी पर और पृथ्वी के नीचे, कि यीशु मसीह परमेश्वर है। उसका कोई प्रतिद्वंद्वी नहीं है। वह अतुलनीय है। उसका नाम ही आदर, सम्मान और महिमा के योग्य एकमात्र नाम है। और हम आज अपने जीवन में इसे ऐसा ही बनाने का चुनाव करते हैं!

मेरी प्रार्थना...

हे महान सर्वशक्तिमान परमेश्वर, इतिहास के हमारे समय में स्वयं अपनी महिमा प्रकट कर। हे प्रिय पिता, मैं अपने पूरे हृदय से प्रार्थना करता हूँ कि सारी पृथ्वी पर तेरा नाम पवित्र माना जाए। ऐसे सामर्थी कार्य कर जो तेरे नियंत्रण और प्रभुता को दर्शाते हैं, ताकि तेरे लोगों की सहायता हो कि वे दूसरों को तेरे नाम का आह्वान करने और तेरी महिमा तथा अनुग्रह के लिए तेरी स्तुति करने के लिए ला सकें। यीशु के पवित्र और बहुमूल्य नाम में, मैं प्रार्थना करता हूँ। आमीन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। help@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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