आज के वचन पर आत्मचिंतन...

जब हम मसीही बने, हम न केवल पवित्र आत्मा से शुद्ध हुए, बरन हम पवित्र आत्मा से परिपूर्ण भर गए| युहन्ना इसे हमारे अभिषेक के रूप में बोलता है। आत्मा हमें यीशु के बारे में सच्चाई सुनने में मदद करती है और हमें वह सच्चाई झूठे शिक्षण के समक्ष आत्मसमर्पण करने से रोकता है जो कि यीशु की पहचान को घटाता है — यीशु, परमेश्वर हमारे साथ और हमारे जैसा है और हम जब इन अविश्वसनीय सत्यों को पकडे रहते हैं तो हम यीशु में बने रहते हैं।

Thoughts on Today's Verse...

When we became Christians, we were not only cleansed by the Holy Spirit, we were also filled with the Holy Spirit. John speaks of this as our anointing. The Spirit helps us hear the truth about Jesus and keeps us from surrendering that truth to false teaching that would diminish either side of Jesus' identity — Jesus, God with us and God like us. We abide in Jesus when we hold on to both of these incredible truths.

मेरी प्रार्थना...

पवित्र और धर्मी पिता, मुझे बचाने के हेतु यीशु को भेजने के लिए धन्यवाद। हो सकता है मैंने कभी भी समर्पण नहीं किया हो उन सभी आश्चर्यों या मेरी गहरी भावनाओं कि , जिसका कारण सिर्फ येशु था और होगा| मुझे अपना आत्मा भेजने के लिए धन्यवाद, मुझे अपने बेटे और मेरे उद्धारकर्ता के बारे में सच्चाई की रक्षा में मदद करने के लिए, जिनके नाम में मैं प्रार्थना करता हूं और धन्यवाद देता हूं।आमीन।

My Prayer...

Holy and Righteous Father, thank you for sending Jesus to save me. May I never surrender my sense of wonder or my deep feelings of appreciation for all that Jesus was, is, and will be. Thank you for sending me your Spirit to help me safeguard the truth about your Son and my Savior, in whose name I pray and give you thanks. Amen.

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। phil@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

Today's Verse Illustrated


Inspirational illustration of १ युहन्ना २:२७

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