आज के वचन पर आत्मचिंतन...
कभी-कभी हम परमेश्वर की सृष्टि के प्रेमपूर्ण आश्चर्यों और "उसके हाथों के कामों" (भजन संहिता 19:1, 111:7) की अद्भुत आशीषों में इतने मग्न हो जाते हैं कि हम उससे यह प्रार्थना करना भूल जाते हैं कि वह हमें अपने सत्य सिखाए, अपनी इच्छा को समझने में हमारी सहायता करे, और हमें अपने दैनिक जीवन में उसके वचन के अनुसार जीने का अनुग्रह प्रदान करे। आइए हम न केवल परमेश्वर की महिमामयी सृष्टि के विस्मय में उसकी आराधना करें; वरन उसकी इच्छा को सीखकर और उसे अपने दैनिक जीवन में जीकर भी उसकी आराधना करें (रोमियों 12:1-2)।
मेरी प्रार्थना...
पवित्र और बहुमूल्य पिता, कृपया मुझे अपना सत्य सिखाएं। मुझे अपनी इच्छा की ओर ले चलें। अपनी बुद्धि में मेरी अगुवाई करें। मैं चाहता हूँ कि मेरा जीवन और मेरे निर्णय मेरे लिए आपकी उस योजना को प्रतिबिंबित करें, जब आपने मुझे मेरी माता के गर्भ में रचा था (भजन संहिता 139:13-16)। मेरी यह अभिलाषा है कि मेरा जीवन आपके धर्ममय स्वभाव, दयालु करुणा और विश्वासयोग्य भलाई को प्रकट करे। यीशु के नाम में मैं इन बातों को मांगता हूँ। आमीन।


