आज के वचन पर आत्मचिंतन...

मानव हृदय की मरम्मत के लिए सबसे बड़ा उपकरण क्या है? ...बाईपास सर्जरी? ... एंजियोप्लास्टी? ...कृत्रिम हृदय? ... प्रत्यारोपण? आपका विचार परमेश्वर के वचन के बारे में कैसा है? आप देख सकते हैं, जबकि ये अन्य तकनीक लोगों के हृदय के लिए बहुत मदद कर सकती हैं, लेकिन ह्रदय की शल्य चिकित्सा के लिए परमेश्वर का उपकरण उसका वचन है यह तीक्ष्ण छुरी प्राण और आत्मा तक पहुच सकती है और इसके साथ हमारे लिए भौतिक आशीष का कारण बन सकती हैं। तो आप अपने ह्रदय में परमेश्वर को कितना स्थान दे रहे हैं,और उसका शक्तिशाली हृदय-चिकित्सा उपकरण स्पर्श करता है? जैसा कि आप परमेश्वर के वचन को खोलते हैं, जैसा कि आप परमेश्वर का संदेश जो प्रचार किया जाता है सुनाते हैं, तो क्यों नहीं आप पवित्र आत्मा की सहायता को समझने के लिए,धारण करने के लिए, और जो पढ़ाया जा रहा है उसे लागू करने में मदत के लिए मांगे? आयिए हम उस महान चिकित्सक को हमारा ह्रदय समर्पित करे ताकि वो उसमे काम कर सके|

Thoughts on Today's Verse...

What is the greatest tool to repair the human heart? ...by-pass surgery? ...angioplasty? ...artificial heart? ...transplant? How about the Word of God? You see, while these other techniques can be of great aid to the physical heart of people, God's tool for heart surgery is his Word. This sharp scalpel can reach the soul and spirit as well as being a physical blessing. So how much of your heart are you offering to God, and his powerful heart-healing tool to touch? As you open God's Scripture, as you hear the message of God preached, why not ask for the Holy Spirit's help to help you understand, apply, and put into practice what is being taught? Let's offer our hearts to the Great Physician to do his work in us!

मेरी प्रार्थना...

पवित्र ईश्वर, मैं यह कहता हूं कि जैसा कि मैंने आपके शास्त्रों को खोला सुना और अपका वचन का प्रचार सुना और सिखा, कि पवित्र आत्मा मेरे ह्रदय में समाया और मुझे पाप के प्रति दोषी ठहराता है, उन क्षेत्रों में मुझे परेशान करता है जहां मुझे विकास की जरूरत है, और वो मेरे उन क्षेत्रों को हिलाता है जहां मुझे प्रेरणा की आवश्यकता है जिससे मैं यीशु की तरह अधिक हो बन सकू, जिसका नाम मैं प्रार्थना करता हूँ। आमीन।

My Prayer...

Holy God, I ask that as I open your Scriptures and hear your Word preached and taught, that the Holy Spirit penetrate my heart and convict me of sin, discomfort me in areas where I need growth, and stir me in areas where I need motivation to be more like Jesus, in whose name I pray. Amen.

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। phil@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

Today's Verse Illustrated


Inspirational illustration of इब्रानियों ४:१२

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