आज के वचन पर आत्मचिंतन...

हाँ, हममें से अनेक लोग अपनी सरकारों की बातों को पसन्द नहीं करते, चाहे हम कहीं भी रहते हों। तथापि, परमेश्वर ने सचमुच हममें से बहुतों को ऐसी आशीष दी है कि हम जहाँ रहते हैं वहाँ के अधिकारियों के संरक्षण का आनन्द ले सकते हैं। पौलुस विश्वासियों को स्मरण करा रहे हैं कि हम अपनी सरकारों और उन नियमों का आदर करें जिनके अधीन हम रहते हैं। इसके साथ ही, प्रथम चेलों के समान, हम भी मसीही युग में अब तक ज्ञात सबसे भीषण सतावटों के दौर में जी रहे हैं। संसार के अनेक भागों में भाई और बहन विरोध, सतावट और पक्षपात का सामना करते हैं। ऐसी परिस्थितियों में, विश्वासियों को अपने राष्ट्रीय और स्थानीय नियमों से पहले परमेश्वर का आदर करना चाहिए। इसलिए, जब हम अपने अगुओं के लिए प्रार्थना करते हैं और अपनी स्वतंत्रताओं के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं, तो आइए हम संसार भर में सताई जा रही कलीसिया को न भूलें। आइए हम उनके छुटकारे, संरक्षण और धीरज के लिए प्रार्थना करें।

मेरी प्रार्थना...

हे महान उद्धारकर्ता, निर्गमन के परमेश्वर, हम सम्पूर्ण इतिहास में और आज भी अपने लोगों के पक्ष में तेरे हस्तक्षेप और संरक्षण के लिए तेरा धन्यवाद करते हैं। हम उन लोगों के लिए तेरा धन्यवाद करते हैं जिनकी मसीही स्वतंत्रताओं की रक्षा हमारी सरकारें और नियम करते हैं। हमारा विश्वास है कि तूने अतीत में अपने लोगों पर अपनी सामर्थ्य और उद्धार को तब प्रगट किया, जब वे जिन नियमों के अधीन रहते थे वे तेरी इच्छा के अनुरूप नहीं थे। अतः हम इस बात के लिए बुद्धि माँगते हैं कि हमें किस रीति से जीवन व्यतीत करना चाहिए, और हम यह विनती भी करते हैं कि आज तू हस्तक्षेप कर और यीशु में अपने विश्वास के कारण सताए गए प्रत्येक विश्वासी को आशीष प्रदान कर। कृपया इन सताए हुए बच्चों को कोमलता, चंगाई और प्रेम की आशीष दे। कृपया अपनी उपस्थिति का उन्हें प्रत्यक्ष निश्चय करा। यीशु के सामर्थी नाम में, हम एक साथ मिलकर संसार भर के विश्वासियों के लिए यह विनती करते हैं। आमीन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। help@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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