आज के वचन पर आत्मचिंतन...

हमारे जीवन में के बहुत से संघर्ष संजोग मात्र नहीं हैं। उनमेसे बहुतसे तो परमेश्वर की ओर से भी नहीं हैं। हमारे संघर्ष अधिकतर हमारे शत्रु के द्वारा आते हैं, शैतान। वह हमेशा ताक में लगा रहता हैं की किसी तरह बेहतर युक्ति से हमे हमारे समर्पण से और सम्बन्ध से जो परमेश्वर के साथ हैं । खुदको परमेश्वर के हांथों में स्थिरता के साथ रखना और उसके मलयुद्ध के हथियारों को इस्तेमाल करना हमें सहायता करेंगी की हम हमारे शत्रु को हरा सके जिसे पहलेसे ही येशु द्वारा लज्जित किया गया हैं और क्रूस पर भी।

मेरी प्रार्थना...

मुझे बल दे हे परमेश्वर की मैं अपने शत्रुओं के सामने स्थिर खड़ा रह सकू और आपके आत्मा की समर्थ से जय पा सकू ताकि मैं आदर और महिमा अपने विजयी मुक्तिदाता को दे सकू जो एक दिन लौट कर आएंगे और जय के साथ मुझे घर ले जायेंगे । जो सफ़ेद घोड़े पर सवार हैं उसके नाम से प्रार्थना करता हूँ । अमिन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। phil@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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