आज के वचन पर आत्मचिंतन...

यीशु के पुनुरुथान ने सब कुछ बदल दिया है !जो महिलाए उसके क्रूस पर चढ़ाये जाने और पुनुरुथान के समय बड़े विश्वासयोग्य थे, वह अपेक्षा में आज्ञाकारि हो कर प्रार्थना किया करते थे। हम भी यह अपेक्षा कर सकते है, की यीशु की माता भी प्रार्थना कर रही होंगी। यदि हम यहा ध्यान से देखे तो हमे यीशु के भाईयो भी दिखाई देंगे जो कभी उसपर शक करते थे और हस्ते थे, अब अपेक्षा के साथ प्रार्थना करते हुए अपने पुनरुथित भाई की सामर्थ की बार्रिश जो पवित्र आत्मा द्वारा हो उनके इन्तेजार में थे। जी,हाँ वे इन्तेजार कर रहे है पर खली इन्तेजार नहीं कर रहे है । जी हाँ वे प्रार्थना कर रहे है पर वे पुनरुथित यीशु की महान काम की अपेक्षा में प्रार्थना कर रहे है,जो उनके द्वारा किये जायेंगे। परमेश्वर महान काम करता है जब वे लोग जो उनसे प्रेम करते है पुनरुथ्तित येशु के नाम से अपेक्षा में प्रार्थना करते है । तो आप किसका इन्तेजार कर रहे है ? ऐसे लोगो के समूह को ढूंढे जो यीशु से प्रेम करते है और इस अपेक्षा के साथ की परमेश्वर आपके द्वारा महान काम करेंगे प्रार्थना में लग जाये ।

मेरी प्रार्थना...

सर्वशक्तिमान और सर्व-शक्तिशाली परमेश्वर, कृपया मेरे प्रयासों को आशिष दे जैसे मे दुसरो को मेरे साथ प्रार्थना में प्रोत्साहित करता हुंँ.में दुवा करता हुंँ कि आप उन सारे लोगो में जागृती लायीये जो आपके नाम को पुकारते है और जो भुखे है उन्मे उत्सव लायीये,जो अभी भी नही पेह्चान्ते है कि वाह भुखे यीशु के लिये है.कृपया आपके लोगो में जागृती लायीये,और आपका अनुग्रह को उन्मे जिसको जनना है,कि यीशु उद्धार करता है. यीशु के नाम से प्रार्थना करता हुंँ.अमीन.

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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