आज के वचन पर आत्मचिंतन...

स्तुति सम्पूर्ण रूप से हमारे चरित्र से जुडी हुई है। तो हमारे लिए परमेश्वर की आराधना करना, हमारे हृदय का इरादा और जीवन के प्रयास यह निर्धारित करना चाहिए की हम उसकी इच्छा को जानने में और जीने में चाहत रखते हैं। जबकि हम यह कभी भी सिद्धता से नहीं कर पाएंगे, अनुग्रह हम पर्याप्त हैं यदि हम उसकी महिमा के लिए जीने के खोजी हों। परन्तु यह अनुग्रह कभी भी दिखावे के तौर पर इस्तेमाल नहीं करना चाहियें अपनी आत्मिक आलसीपन या इच्छानुरूप कमजोरिओं को ढापने के लिए।

Thoughts on Today's Verse...

Praise is integrally connected with our character. So for us to worship God, the intent of our hearts and the effort of our lives must show the determined desire to know and live his will. While we will never do this perfectly, grace covers us as we seek to live for his glory. But that grace must never be used as a pretense to excuse spiritual laziness or intentional weakness.

मेरी प्रार्थना...

पवित्र परमेश्वर, मैं चरित्र में आपकी तरह और अधिक बनना चाहता हूँ बल्कि मैं कभी भी ना तो समर्थ में नहीं गौरव में आपकी तरह हो पाउँगा।मेरी आंखों को खोलियें और आत्मा के द्वारा मुझे ज्योतिर्मय कर जबकि मैं तेरे वचनों में तेरी इच्छा की खोज करता हूँ और यह भी की मैं अपने प्रति दिन के जीवन में आज्ञाकारी बना रहूं। मुझे मेरे पापों से क्षमा कर और एक स्वच्छ और पवित्र हृदय उत्पन कर, पूर्णतः आपकी इच्छा को कर सकने में निर्धारित हो। येशु के नाम से प्रार्थना करता हूँ। आमीन।

My Prayer...

Holy God, I want to be more like you in character even though I will never be like you in might or majesty. Open my eyes and through the Spirit enlighten me as I seek your will in your Scriptures and as I seek to be obedient in my daily life. Forgive me of my sin and create a clean and holy heart, wholly determined to do your will. In Jesus' name I pray. Amen.

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। phil@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

Today's Verse Illustrated


Inspirational illustration of भजनसहिंता ११९:७

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