आज के वचन पर आत्मचिंतन...

हम मनुष्य हमेशा जीवन में अपनी जगह "बलाधिक्रम" में परिभाषित करने की कोशिश करते रहता हैं। येशु अपने चेलों को स्मरण दिला रहें हैं की यदि वे सचमे उसके राज्य के भागी होना चाहते हैं तो उन्हें अपने दैनिक जीवन में बलाधिक्रम के नियमों को फेकदेने की जरुरत हैं । यहाँ तक की, वह उनसे काफी नाराज़ हुआ क्योकि उन्होंने बच्चों को उसके पास ना आने दिया, प्रतयक्ष रूपसे क्योकि इन चेलों के खयाल में यह नहीं आया और उन्होंने उन छोटे बच्चों को गुरु के समय, ऊर्जा, और ध्यान के योग्य नहीं जाना । येशु ने जैंसे की वह सामान्यताः करता हैं उनके सांसारिक सिद्धांतों को उलट के रख दियाऔर उन्हें याद दिलाया की उनको बच्चों के चरित्रों पर अधिक ध्यान देने की आवश्कयता हैं बजाय इसके की खुदके प्रति महत्वता देने के यदि वे कभी परमेश्वर के राज्य को कभी समझना चाहते हो तो ।

मेरी प्रार्थना...

पिता, मुझे अपने बच्चे की तरह महत्व देने के लिए धन्यवाद। जबकि मैं आपके लिए और आपके राज्य के लिए जीने की खोज में हूँ, मुझमे अध्भुता, मानवीयता और आदर फिरसे जगा दीजिये! येशु के नाम से मैं प्रार्थतना करता हूँ । अमिन ।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। phil@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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