आज के वचन पर आत्मचिंतन...

मुझे नहीं पता की पश्चयताप (अपने हृदय और जीवनों को परमेश्वर की और मोड़ना) के विषय में हमे क्या डर हैं? परमेश्वर न केवल हमें ग्रहण करेंगे ; वह हमें छुड़ाएंगे और पुन्हः निर्माण भी करेंगे। लिकेन वह पश्चयताप करना हमारे लिए अधिकतम कठिन होता हैं । हम पुराने हानिकारक तौर-तरीकों में और व्यसनकारी बर्ताव में फस जाते हैं। हम्म शैतान के धोकेबाजी झूठ में विशवास करते हैं। हम खुद मे आत्मा के कामों को हारने के लिए स्वयं- विरोधात्मक विचारों का उपयोग करते हैं। तो क्यों न हम खुलकर बहार आएं और अपने पापों को माने और सचमे परमेश्वर को अपना जीवन सौपदे ! यदि हम ऐसा करें, तो हम कुछ सच्ची ताजगी पाएंगे !

मेरी प्रार्थना...

पवित्र और धर्मी पिता, मुझे नहीं पता की क्यों मैं अपने पसंदीदा पापों को इतना पक्का पड़े रहता हूँ। मुझमे ।का एक भाग इन सब बंधनों से आज़ाद होना चाहता हैं, लेकिन एक भाग नहीं भी होना चाहता हैं।मुझे आपकी मददत चाहिए की मैं पुरे तौर पर आपको सौप सकू। कृपया मुझे आपकी चनगाई, शुद्ध करने वाली और ताजगी देने वाली सामर्थ पवित्र आत्मा द्वारा भेजे की मेरे मददत कर सकें, जब मैं अपने हृदय में निर्णय लेता हूँ और सम्पूर्णतः से अपना जीवन आपकी ओर करता हूँ । येशु के नाम से प्रार्थना करता हूँ । आमीन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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