आज के वचन पर आत्मचिंतन...
परमेश्वर के विरुद्ध पाप और बलवे के समान हमारे हृदयों को कोई भी वस्तु कलंकित नहीं करती और न ही उस पर ऐसा अशुद्ध आत्मिक मैल छोड़ती है। तौभी, जब हम अपने हृदयों को उसकी ओर फेरते हैं — जब हम उसके साथ वाद-विवाद करने के उसके बुलावे को सुनते हैं और उसके अनुग्रह को ग्रहण करते हैं, तब परमेश्वर का अनुग्रह बहुतायत से प्रगट होता है। जब हम अपने पापों को मान लेते हैं, तो परमेश्वर केवल उन्हें क्षमा ही नहीं करता; वह केवल उन्हें भूलता ही नहीं; वरन वह हमें शुद्ध करता है और पाप तथा उसके मैल दोनों को दूर कर देता है (1 यूहन्ना 1:9, 2:1-2)। हमारे पाप सदा के लिए मिट जाते हैं। पाप का कलंक मिटा दिया जाता है; हमारा दोष दूर कर दिया जाता है। हम उसके अनुग्रह के द्वारा शुद्ध किए जाते हैं (रोमियों 5:6-11)। परमेश्वर कहता है, "आओ... हम आपस में वाद-विवाद करें"। अतः, आइए हम समझ की सुनें और उसके अनुग्रह के अधीन हो जाएं!
मेरी प्रार्थना...
हे प्यारे परमेश्वर, तेरा अनुग्रह हमें जो महिमामय आनन्द प्रदान करता है, वह कैसा अद्भुत है! हमारे जीवनों को पाप और विनाश से फेरकर अपने प्रेम और अनुग्रह की ओर मोड़ने के लिए हम तेरा धन्यवाद या तेरी स्तुति कभी पूरी तरह नहीं कर सकते। हम अपना जीवन, अपनी आशा, और अपनी पवित्रता तेरे ही अनुग्रह में पाते हैं। हम उस अनुग्रह को व्यर्थ नहीं जानते, वरन अपने जीवनों में तेरे प्रेम, क्षमा, और छुटकारे के उद्देश्यों का आदर करते हुए जीवन बिताने के द्वारा उस अनुग्रह का प्रत्युत्तर देते हैं। यीशु के नाम से, हम धन्यवाद देते हैं और तेरे अनुग्रह का आदर करते हुए जीने के लिए प्रार्थना करते हैं। आमीन।


