आज के वचन पर आत्मचिंतन...

परमेश्वर हमारा राहत देनेवाला सम्भालनेवाला और प्रभु है । सिर्फ उसकी अनुग्रहकारी उपस्तिथि और कोमल आशीषें ही हमे राहत और सांत्वना दे सकते है हमारे बेचैन और निराश मन को । तो आओ हम उसके पास पूरी ईमानदारी से अपने पाप और दुःख दोनों मानकर लौट जाये । आइये उससे मांगे की वह हमारी चिंतायें लेले और हमारे उद्धार के जोश, आनंद और आत्मविश्वास को पुनः सपित करे ।

Thoughts on Today's Verse...

God is our comforter, sustainer, and Lord. Only his gracious presence and tender blessings can bring consolation and comfort to our restless and discouraged souls. So let's turn to him, honestly confessing both our sins and our sorrows. Let's ask him to take our anxiety away and restore to us the passion, the joy, and the confidence of our salvation.

मेरी प्रार्थना...

सर्वसमर्थी चरवाह, बहुत से विचारों के बोझ की आवाज़ों और भ्रम में, अपने पवित्र आत्मा से मेरी सेवकाई करे । मुझे आपके राहत और शांति जरुरत है । मैं आपकी उपस्तिथि और अनुग्रह की मांग करता हूँ । येशु के नाम से मांगता हूँ । आमीन ।

My Prayer...

Almighty Shepherd, in the noise and confusion of many thoughts burdened by many concerns, minister to me through your Holy Spirit. I need your comfort and peace. I ask for your presence and your grace. In Jesus' name I ask. Amen.

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। phil@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

Today's Verse Illustrated


Inspirational illustration of भजन सहिंता ९४:१९

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