आज के वचन पर आत्मचिंतन...

चाहे हम कैसे ही नई शुरवात क्यों न करे , या कितने ही महान योजनाए क्यों न बनाये , पर यदि हम परमेश्वर के साथ न चले, तो आने वाले वर्ष में हमे आत्मिक सफलताए नहीं मिलेंगी। अब जो हमे नए वर्ष की यह भेट मिल रही है, तो चलो यह संकल्प करे की प्रभु की सेवा करेंगे।अब जो हम आने वाले दिनों की योजनाए बना रहे है, तो यह निश्चित करे की वह योजनाओ का प्रकाशन प्रभु के वचनों के आधारित इछाओ, पवित्र आत्मा की अगवाई में और परमेश्वर हम से क्या पूरा कराना चाहता है यह प्राथनापूर्वक विचार के साथ ही वह सारी योजनाए बनी है।

मेरी प्रार्थना...

युगांयुग के परमेश्वर, मेरे स्वर्गीय पिता, धन्यवाद् की आप इस नए वर्ष की शुरवात में मेरे इतने करीब है। कृपया मेरी सहायता करे की मैं आपकी मर्जी प्रति दिन जान सकु। मेरे जीवन में उन लोगो को नदीक लाईए जो मुझे आप से और अधिक प्रेम करने में, प्रभावित रूप से सेवा करने में, और सार्थक तरीको से औरो को आशीषित करने मे सहायता करे। आने वाले दिनों में जो कुछ मैं करू, सोचु, और कहू उसमे सारा आदर और महिमा आप ही को मिले। यीशु के नामसे मैं प्रार्थना करता हु। आमीन॥

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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