आज के वचन पर आत्मचिंतन...

हम युद्ध में हैं| हर रोज़ हमें लड़ाइयाँ लड़नी पड़ती हैं| वो सिर्फ बुरे कामों और गलत ख्यालों से ही नहीं होतीं| हमारा एक असली दुश्मन है जो हमें नष्ट करना चाहता है| लेकिन, हमारा दुश्मन पहले ही हार चुका है| और उसके दूत दंडित हो चुके हैं| तो चलिए| अपना आध्यात्मिक बल बनाए रखें| ये जानते हुए कि हम सिर्फ दिखावे के लिए पूजा नहीं कर रहे| बल्कि राज्य के लिए लड़ रहे हैं| कोई आश्चर्य नहीं कि यीशु ने हमें प्रभु की प्रार्थना में सिखाया: "और हमें परीक्षा में न ला, परन्तु बुराई से बचा" (मत्ती 6:13)| हाँ, हम बुराई करने वाले से युद्ध में हैं - उसके झूठ और हमें नष्ट करने की उसकी इच्छा के खिलाफ, लेकिन हम निडर और खुश रह सकते हैं क्योंकि हमारे प्रभु ने बुराई करने वाले को और दुनिया पर उसकी बुरी पकड़ को जीत लिया है (यूहन्ना 16:33; कुलुस्सियों 2:15)|

मेरी प्रार्थना...

सर्वशक्तिमान और विजयी राजा, मैं आपके इसलिये गुण गाता हूँ कि आपने हमारे लिये पाप, मृत्यु, नरक और बुराई पर विजय प्राप्त की| आपके विजयी बलिदान ने हमें धर्मी और पाप रहित बना दिया है, जिससे यह निश्चित हो गया है कि हम आपके साथ विजयी होंगे| धन्यवाद, प्रभु यीशु! आमीन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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