आज के वचन पर आत्मचिंतन...

इस सूंदर भजन जिसके बोल, "हे पवित्र सिर," के अंतिम पंक्तिया इन बोलों के साथ खत्म होती हैं: " प्रभु , मेरे जीवन से कभी भी, कभी भी, तेरे प्रेम मुझसे अलग न हो।" इस ही भावना के साथ एक और जोड़ना चाहता हूँ : प्रभु, कभी भी, कभी भी, मुझे न मरने देना जब तक अगली पीढ़ी तुझे न जाने !"

मेरी प्रार्थना...

सर्वसामर्थी प्रभु परमेश्वर, महान मैं हूँ, मुझे और उनको जो मेरी पीढ़ी के हैं सहायता करियें की हम आपके सामर्थ और महिमा के प्रति हमारी सरहाना को उन तक पंहुचा सके जो हमारे बाद आएंगे। मेरे बाद निरंतर आनेवाली कईं विश्वास की पीढ़ियों से अपनी कलीसियन के भविष्य को अशिक्षित करियें या जब तक आप अपने पुत्र को नहीं भेजते की वह आपके लोगों को घर लेजाएं। मेरे आनेवाले यीशु मसीहा के नाम से प्रार्थना करता हूँ। अमिन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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