आज के वचन पर आत्मचिंतन...

"आओ चले।" हमे लौटना पड़ता हैं —- कभी कभी नहीं, पर कई बार हर दिन! जो बात अध्भुत हैं वह यह हैं की यीशु अपने चेलों को ( जो आज हम हैं) आमंत्रित करते हैं की हम उनके साथ शांत जगह पर लौट चले और आराम करें । बचपन की वह प्रार्थना यंहा सटीक बैठती हैं की, " अब मैं सोने के लिए लेटता हूँ और मेरे प्राण की रक्षा प्रभु करे ये प्रार्थना करता हूँ।" यह केवल एक अच्छी रात्रि की नींद के लिए नहीं हैं, बल्कि यह की हम अपने अनियंत्रित और व्यस्त दिनों क मध्य में समय निकाले उसके साथ अनुग्रह, आराम और ताजगी के कुछ पल बिताने के लिए। आईये, इन प्रतिदिन के प्रभु समयों को ईमेल देखने की हमारी आदत से अधिक करे: यह समय को हमारे उद्धारकरता के साथ लौटने का समय बना दे और उसके साथ कुछ वक़्त आराम के बिताये।

मेरी प्रार्थना...

पवित्र और सभ्य चरवाह मेरे प्राण के, आपके निरंतर देखभाल और प्यारी विश्वासयोग्यता के लिए धन्यवाद्। कृपया मेरे हृदय को छुइयें मैं जब खुदको अनुशाषित करता हूँ की आपके साथ आराम समय व्यतीत करूँ। कृपया मेरे प्राण की रक्षा करे परन्तु उससे भी अधिक मेरे प्राण को पुनर्स्थापित करों की मैं आपके पुत्र और मेरे उद्धारक यीशु के साथ लौटता हूँ की उसके साथ समय बिताऊं, जिसके नाम से प्रार्थना करता हूँ । अमिन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। phil@verseoftheday.com पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

टिप्पणियाँ