आज के वचन पर आत्मचिंतन...

प्रेम आनंद है|और जो आनंद प्रेम में है वो, वास्तविक एवम सच्ची है इसलिए येशु के चेले होने के नाते हम न छल से, न जोड़ तोड़ कर या न बलपूर्वक सम्बन्ध स्थापित करते हैं वरन हम पारदर्शी, आत्मीय, और ईमानदारी के साथ सम्बन्ध स्थापित करे. क्यों? क्योकि सच्चा प्रेम हमेशा सच्चाई से आनंदित होता है|

मेरी प्रार्थना...

हे प्रभु, प्रेम और सच्चाई का परमेश्वर जैसे आप मेरे अन्दर पवित्र आत्मा के द्वारा प्रेम को भरते हैं उसी प्रकार कृपया मेरे प्रेम को शुध्ध करे जो बिना छल, जोड़ तोड़ वाला, या कपटी न हो वरन वास्तविक और सच्चा हो|येशु के नाम से प्राथना मांगता हूँ| आमीन!

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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