आज के वचन पर आत्मचिंतन...

क्या है जिससे आपकी रात गुजर गई और आप बने रहे? क्या है जिससे आपका आज गुजर जायेगा? क्या है जो आपको सक्षम करे की आप आज के बाकि बचे दिन से कुछ हासिल कर सकेंगे या बेहतर फल ला सकेंगे? प्रभु की दया। यह अद्धभुत संसाधन कभी ख़तम नहीं होते! हर नया दिन उनकी ताज़ी आपूर्ति करता है। परमेश्वर विश्वासयोग्य है और वह ये देखता है हमे ये रोज़ मिले। परमेश्वर की स्तुति हो की हर रोज़ वह हमारे संसार को नया और स्वछ बनाता है ।

मेरी प्रार्थना...

धन्यवाद् पवित्र परमेश्ववर और प्रेमी पिता, बीती रात बनाये रखने के लिए और जीवन यात्रा के अंत में अनंत दिनों का वादा करने के लिए । मेरे स्वर्गीय पिता होने दे की आप मेरे होंटो पर और दिल में हर समय आप ही के प्रेम और स्तुति को पाए। यीशु के नाम से। अमिन ।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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