आज के वचन पर आत्मचिंतन...

"सोचता मैं उस मीटिंग में क्या पहनू ?" पौलुस बताता हैं की एक ऐसा भी कपड़े का जोड़ाहों जो हमेशा स्टाइल में होता हैं। हम यह कपडे पहनते हैं क्योकि हम विशेष लोग हैं। यह कपड़ें ख़ास कपड़ों के संग्रह से आते हैं जिसे चरित्र कहतें हैं और जब हम लोगों के साथ होते हैं बेहतर रूप से पहने जाते हैं । यह गुणवत्ताओं को पहनना कठिन हैं, परन्तु यह हमेशा आशीष होती हैं उनके लिए जो हमसे मिलते हैं जब हम इन कपड़ों को पहने होते हैं।

मेरी प्रार्थना...

अब्बा पिता, धन्यवाद मुझे अपने परिवार में शामिल करने के लिए। होने दे की औरों के प्रति मेरे व्यहवार में मैं कभी आपको निराश न करू । होने दे की मुझमे उन्हें ऐसा दिखाई दे की, यह चरित्र की गुणवत्तायें मेरे जीवन में केवल आपके उपस्तिथि को ही श्रेया दे रही हों। सारा आदर और महिमा आप ही को मिले हमेशा और हमेशा, मेरे प्रभु येशु के नाम से। अमिन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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