आज के वचन पर आत्मचिंतन...

वाह! क्या सन्देश हैं। परमेश्वर चाहता हैं की हम अपने जीवन में उद्पादक बने । वह चाहता हैं की हमारे पास दिमागी ज्ञान से और अधिक हो, वह चाहता हैं की हम उसे अपने जीवन में इस्तेमाल करे और उसके साथ प्रभावशाली और फलदाई बने । परन्तु मेरे लिए जरुरी हैं की, मैं इसमें और अधिक मेहनत करू और इन खूबियों में बढ़ने कोशिश करू । पतरस कह रहा हैं "ठीक है लोगों, परमेश्वर चाहता हैं की तुम उसके पिचें जाओं और अपने जीवन के द्वारा खुश बदलाव लाओं!" मैं तैयार हूँ! आऊं आज ही शुरू करतें हैं।

मेरी प्रार्थना...

पवित्र परमेश्वर मैं मेहनत करूँगा की आपके अनुग्रह में बढूं । कृपया मेरे मेहनत पर आशीष करना और उन्हें मेरी हार्दिक सरहाना समझ कर ग्रहण करना जब मैं अप्रीतिकर था मुझे प्रेम करने के लिए और मुझे बचने के लिए जब मैं भटका हुआ था। मैं आपकी महिमा के लिए येशु के साथ अपने जीवन से फलवन्त होना चाहता हूँ, जिसके नामसे मैं प्रार्थना करता हूँ। अमिन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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