आज के वचन पर आत्मचिंतन...

बाइबिल के शुरवाती अध्यायों में ही हमे कई महान सत्यो को सिखने को मिलता है । पहिला , हम परमेश्वर के स्वरुप में रचे गए है , दोनों नर और नारी । दूसरा, हमे भिन्न होने के लिए बनाया गया है (नर और नारी)। तीसरा, हमे एक दूसरे को आशीषित करने के लिए और एक दूसरे को सम्पूर्ण करने के लिए बनाया गया है । चौथा, पति और पत्नी को बनाया गया था की वे अपने मूल परिवार को छोड़ दे और साथ में अपनी दुनिया बनाये (उत्तपत्ति १:२६- २:२५ )। जीवनसाथी को ढूंढ़ना , जिसे परमेश्वर ने अपने स्वरुप में रचा है, इसका मतलब है जो सच में अच्छा है और जो सच में परमेश्वर की इच्छा है ।

मेरी प्रार्थना...

पिता मेरे जीवन के प्रति आपकी योजनाओ के लिए धन्यवाद देता हूँ । (विवाहिताओं के लिए ) मैं अपने जीवनसाथी के लिए धन्यवाद देता हूँ और आपसे मांगता हूँ की आप मुझे उस व्यक्ति को अशिक्षित करने में और सम्पूर्ण रीती से संतुष्ट करने में मदद करे । (विधवाओं के लिए ) मैं आपसे मांगता हूँ , प्रिय पिता , की मेरा नुक्सान और दर्द की भावनाओ को आराम पहुचाओ और आप जानते है की मेरा धन्यवाद् उस विशेष व्यक्ति के लिए है जिसे आपने मुझे दिया था जिस के द्वारा आपने मेरे जीवन को आशीष भी दी । (कुवारो के लिए ) मैं आपसे मांगता हूँ की आप मेरे जीवन के रह मुझे मालूम करने में मेरी मदद करे और मेरे जीवन से लोग आशीषित हो की मेरा जीवन ईमानदारी और विश्वासयोग्यता से जीउ । (तलाक़शुदाओ के लिए ) मैं मांगता हूँ, प्रिय पिता , मेरे नुक्सान की चेतना की सुधि ले और अपनी सेवा के लिए और तेरी महिमा के लिए मुझे इस्तेमाल कर । येशु के नाम से प्रार्थना करता हूँ । अमिन।

आज का वचन का आत्मचिंतन और प्रार्थना फिल वैर द्वारा लिखित है। [email protected] पर आप अपने प्रशन और टिपानिया ईमेल द्वारा भेज सकते है।

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